Author: youthinpolitics

Communism in India: Destined for Failure?

What image comes to your mind when you think of an Indian Communist? Most of you might visualise a man at least in his sixties, in a white kurta, wearing glasses with an unconvincing smile on his face. He seems to be giving a speech in front of an oldish microphone, shouting ideological jargon- words like “revolution” and “cholbe na” being commonly uttered.

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सालाबेग- युद्ध से भक्ति तक

लेखक – अदनान भक्ति को सर्वोपरि माना जाता है । यह भावना जाति, लिंग, आयु, धर्म की मानव निर्मित सभी सीमाओं को पार कर जाती है। आज हम आपके लिए भगवान जगन्नाथ के एक महान भक्त की कहानी बताना चाहते हैं । वह भले ही अलग धर्म में पैदा हुए थे लेकिन उनकी भावनाओं और […]

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Where is gender in political discussions?

There are many ways in which gender disparity manifests itself, including social stereotyping, domestic and societal violence, gender pay gaps, etc. It is not surprising that a large segment of our society experiences unequal or disadvantageous treatment based on gender. Considering the multilayered nature of Indian society, which includes class, caste, and urban and rural divides, the inequality and abuse women face differ due to their intersection with two or more of these factors. While Beti Bachao, Beti Padhao and many other schemes have surfaced to empower women in India, the big question I still feel is whether men in politics are ready to share the power with women?

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कर्पूरी ठाकुर – एक जननायक

24 जनवरी 1924 को समस्तीपुर जिले के पितोंझिया गाँव में एक लड़के का जन्म हुआ नाम रखा गया कर्पूरी ठाकुर। जाति से नाई कर्पूरी ठाकुर पढाई में तेज़ थे और साथ ही राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित थे जिसके चलते उन्होंने अखिल भारतीय छात्र संघ की सदस्यता ली और भारत छोड़ो आंदोलन में भी भाग लिया।

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कांग्रेस का साथ और नेशनल हेराल्ड, क्या है विवाद?

कुछ दिनों पहले कांग्रेस नेता और वायनाड से सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को प्रवर्तन निदेशालय ने समन जारी किया था । प्रवर्तन निदेशालय ने मनीलॉन्डरिंग निवारण कानून की आपराधिक धाराओं के तहत उनके बयान दर्ज किए ।यह जांच नेशनल हेराल्ड नामक ‘अखबार के ज़रिए हुई वित्तीय अनियमितताओं’ से जुड़ी है।यह मामला सबके सामने आया सन् 2012 में, जब भारतीय जनता पार्टी के नेता और वकील सुब्रमयणम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष एक शिकायत दर्ज करते हुये कांग्रेस नेताओ पर धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप लगाये थे।

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बगावत का फल बीजेपी के लिए मीठा है !

एकनाथ शिंदे की ताजपोशी हो गई और वह महाराष्ट्र के 20वें मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इसी के चलते महाराष्ट्र में चल रही राजनीतिक उठापटक भी शांत हो गयी है। सत्ता की कुर्सी इर्द-गिर्द रचे गए इस पूरे घटनाचक्र में बीजेपी केंद्र में रही। लेकिन सवाल यह है कि शिवसेना के दो खंड करने और मुख्यमंत्री की कुर्सी ठाकरे परिवार के नीचे से खींचने में भाजपा को क्या मिला।

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जाति न पूछो साधू की …..

जाति न पूछो साधू की, पूछ लीजिए ज्ञान, भारत में सियासत के लिए इस बात के कुछ मायने नहीं हैं| ऐसा लगता है कि ये ज्ञान सिर्फ और सिर्फ स्कूल की किताबों के लिए है, असल जिंदगी में सियासत ही सब कुछ है जो फिलहाल कह रही है कि सबसे पहले जाति ही पूछो और वो भी सबकी। हाल के समय में यह विषय सर्वाधिक विवाद में रहा है। जाति और आरक्षण संबंधी पुरानी बहसों की तरह ही इसमें भी स्पष्ट खांचें बने हुए हैं ।

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किसी को ‘हिटलर’ कहने से पहले अब ये ज़रूर सोचिएगा ?

भारत में आम बोलचाल की भाषा में ‘हिटलर’ शब्द ख़ूब इस्तेमाल होता है । ख़ास तौर से एक विशेषण के तौर पर । यदि कोई यहाँ अपनी ज़िद पर अड़ना अपनी आदत बना लेता है और अपनी राय को ही आख़िरी फ़ैसला समझता है , तो हम इसे ‘हिटलर’ के विशेषण से नवाज़ देते हैं। भारत की राजनीति में भी यदा- कदा नेता एक दूसरे को ‘हिटलर’ कहते रहे हैं। क्या यह इतनी सामान्य बात है कि बातचीत में ही सही ,किसी को हिटलर कह दिया जाए ।इसलिए मैने सोचा कि हिटलर के उन निजी पक्षों पर लिखता हूँ ,जो आम जनता में ज़्यादा चर्चित नहीं हैं । फिर आप ख़ुद तय कीजिएगा कि किसे हिटलर कहना है किसे नहीं ।

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हेट स्पीच के बढ़ते मामले और बर्बाद होता सामाजिक ताना-बाना!

भारत का मूल स्वरूप है विविधता में एकता। सैकड़ों साल की गुलामी के बाद जब देश आज़ाद हुआ तो विदेशियों ने कहा कि हिंदुस्तान में अगर लोकतंत्र स्थापित होता है तो वह मात्र एक अपवाद होगा। उनका तर्क था कि भारत में इतनी विविधता है कि यहां लोकतंत्र के बचाए रखना बड़ी चुनौती साबित होगा। लेकिन देश ने उनकी इस बात को 1947 से अबतक गलत साबित किया है।

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अगर आप युवा हैं और राजनीति से निराश हैं तो ये ब्लॉग आपके लिए है । यूथ और पॉलिटिक्स (भाग-1)

अगर आप युवा हैं और राजनीति से निराश हैं तो ये ब्लॉग आपके लिए है । यूथ और पॉलिटिक्स । दोनों ही कमाल के शब्द हैं और एक दूसरे के सहयोगी भी , लेकिन हैरानी की बात यह है कि दोनों का इस्तेमाल एक दूसरे के ख़िलाफ़ किया गया है । राजनीति का युवाओं के विरुद्ध । युवाओं का राजनीति के ख़िलाफ़ । कैसे ? आज युवाओं का लगता है कि राजनीति विरासती लोगों , अमीरों और अपराधियों का काम है ।

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